पद्मश्री तेची गुब‍िन: 4 साल में मां का देहांत, पकड़ी कूची, और फ‍िर अरुणाचल प्रदेश को कर द‍िया जीवंत

पद्मश्री तेची गुब‍िन: 4 साल में मां का देहांत, पकड़ी कूची, और फ‍िर अरुणाचल प्रदेश को कर द‍िया जीवंत
अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले तेची गुब‍िन को पद्मश्री 2026 से सम्‍मान‍ित क‍िया गया है. पहचान के वास्‍तुकार कहे जाने वाले तेची 1964 में जन्‍मे और स्‍थानीय डोनीपोलो धर्म से काफी गहराई से जुड़े रहे. चार साल की उम्र में उन्‍होंने अपनी मां को खो द‍िया, ज‍िससे वे अंतर्मुखी हो गए और च‍ित्रकारी में पूरी तरह खोए रहते. च‍ित्रकारी ने दुन‍िया को देखने की उनकी समझ ने बेहतर बनाया. उनकी च‍ित्रकारी के प्रत‍ि न‍िष्‍ठा उन्‍हें चंडीगढ़ ले आई, जहां उन्‍होंने आर्किटेक्‍चर की पढ़ाई की. वापस अरुणाचल प्रदेश लौटकर वे पीडब्‍ल्‍यूडी में राज्‍य के चीफ आर्किटेक्‍ट बने. दशकों तक इन्‍होंने राज्‍य की सार्वजन‍िक ढांचों का ड‍िजाइन न‍िर्माण क‍िया और अरुणाचल प्रदेश के व‍िकास में महत्‍वपूर्ण भूम‍िका न‍िभाई लेक‍िन उनकी असली यात्रा तो अब शुरू होनी थी. उन्‍होंने देखा क‍ि राज्‍य में लोग अपनी जड़ों से कट रहे हैं और अपने धर्म और परंपराओं को भूल रहे हैं जो क‍ि उनकी पहचान रही हैं. तेची गुब‍िन ने 90 गांवों की पैदल यात्रा की और प्रदेश के डोनीपोलो धर्म को फ‍िर से स्‍था‍प‍ित करने और लोगों के दिलों में न‍िष्‍ठा पैदा करने में बेहतरीन भूम‍िका न‍िभाई. आइए इस वीड‍ियो में सुनते हैं उनकी पूरी यात्रा के बारे में..