कश्मीर से शुरू हुई वो एकता यात्रा… शिवराज सिंह चौहान ने सुनाई वो कहानी, जो आज भी कम लोग जानते हैं
Shivraj Singh Chauhan: दिल्ली में एक बुक लॉन्च में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बताते हैं कि उन्हें संगठन के कार्यकर्ता, मुख्यमंत्री और बाद में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ काम करने का बहुत लंबा अनुभव मिला. इस दौरान उन्होंने कई ऐसे फैसलों और अभियानों में हिस्सा लिया जिन्होंने जनता की जिंदगी और राजनीति दोनों को बदल दिया. वे कहते हैं कि उन्होंने जो कुछ सीखा और अनुभव किया, वो सिर्फ नेताओं या राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अधिकारियों, प्रोफेशनल्स, उद्योगपतियों, स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं और समाजसेवियों के लिए भी उपयोगी है. इसी सोच के कारण उन्होंने अपने अनुभवों को एक किताब के रूप में लोगों तक पहुंचाने का फैसला लिया. फिर वे वापस जाते हैं उस समय की ओर जब देश आतंकवाद से जूझ रहा था और कश्मीर में हालात बेहद तनावपूर्ण थे. उसी दौर में 'एकता यात्रा' (Ekta Yatra, 1991) की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य था देश में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना और श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना. इस यात्रा को राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से आगे बढ़ाने में उस समय के नेताओं की भूमिका रही, जिनमें डॉ. मुरली मनोहर जोशी प्रमुख थे और इस अभियान को जमीनी स्तर पर युवाओं तक ले जाने और संगठनात्मक रूप देने की जिम्मेदारी उस समय युवा संगठन में सक्रिय नरेंद्र मोदी को मिली थी. शिवराज सिंह चौहान याद करते हैं कि उस समय उन्होंने 'केसरिया वाहिनी' जैसे युवा नेटवर्क के जरिए लोगों को जोड़ने और देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया. उनका संदेश यही था कि तिरंगा सिर्फ किसी जगह पर नहीं, बल्कि हर भारतीय के दिल में लहराना चाहिए.