लाट साहब के दौर के क्लब आखिर हैं किसके लिए, 'हम भारत के लोग' तो ड्योढ़ी भी नहीं लांघ पाते

लाट साहब के दौर के क्लब आखिर हैं किसके लिए, 'हम भारत के लोग' तो ड्योढ़ी भी नहीं लांघ पाते
दिल्ली में प्रधानमंत्री निवास के सामने लाट साहब के दौर के जिमखाना क्लब को लेकर तमाम चर्चा चल रही है. सेना के दिग्गजों के अलावा रिटायर आला नौकरशाह, बड़े वकील और एलीट वर्ग इसे खाली कराए जाने के फैसले की मुखालफत कर रहा है. इसे ऐतिहासिक विरासत बताया जा रहा है. ऐसे क्लब देश के तकरीबन हर उस बड़े शहर में हैं जहां सेना का बड़ा अमला रहता रहा हो. अंग्रेजी हुकूमत के दौर में तो इस तरह के क्लब जरुरी थे, क्योंकि अंग्रेज कहां मिलते कहां बैठते. लेकिन आजाद भारत में सच में ऐसे एलीट कहे जाने वाले क्लबों की जरुरत है भी क्या जिसका आम आदमी से कुछ लेना देना न हो. आम आमदी से सिर्फ इतने भर के लिए इनका समर्थन करता रहे कि ये शहर की शान हैं.