पढ़ने की चाह बनी मंज‍िल, आज 20 लाख क‍िताबों के संरक्षक हैं पद्मश्री 2026 अंकेगौड़ा

पढ़ने की चाह बनी मंज‍िल, आज 20 लाख क‍िताबों के संरक्षक हैं पद्मश्री 2026 अंकेगौड़ा
ये हैं कर्नाटक के अंकेगौड़ा एम को साल पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है. किसान परिवार में जन्मे अंकेगौड़ा को स्कूल के दिनों से ही किताबों से लगाव हो गया था. शुरुआत विवेकानंद की रचनाओं से हुई. मास्टर्स के दौरान उन्हें मिले प्रोफेसर अनंत रमैय्या ने अंकेगौड़ा की इस चाह को पहचान कर एक दिशा दी. अंकेगौड़ा बताते हैं कि उन दिनों उनके गांव और आसपास किताबें नहीं होती थीं तो वे किताबों के लिए मैसूर जाते थे. सिर्फ वे ही नहीं बल्कि और भी लोग किताबों के लिए परेशान थे. चीनी मिल में नौकरी और बस कंडक्टरी के दौरान वे सोचते रहे कि ऐसा क्या किया जाए कि सभी को किताबें मिल सकें. अंकेगौड़ा ने कहा, फिर मैंने सोचा कि एक दिन ऐसी लाइब्रेरी बनाउंगा, जहां लोग खुलकर पढ़ाई कर सकें. यहां आईएएस, आईपीएस और केपीएस जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सभी किताबें मौजूद हों और फिर छोटी रकम और छोटी लाइब्रेरी से यह सिलसिला शुरू होकर एक अभियान बन गया. आज अंकेगौड़ा की लाइब्रेरी में 20 लाख से ज्यादा किताबें हैं. हजारों लोग इस लाइब्रेरी से फायदा ले चुके हैं और आज भी ये सिलसिला चल रहा है.