अयोध्या हनुमानगढ़ी में नवाब मंसूर अली खां के पुत्र का हनुमान जी की कृपा से बची जान, तब 52 बीघा मंदिर को किया दान, जाने
अयोध्या की हनुमानगढ़ी मंदिर से जुड़ी प्रचलित कथा के अनुसार 18वीं शताब्दी के दौरान अवध के नवाब मंसूर अली खां के पुत्र की तबीयत अचानक बेहद खराब हो गई थी. नवाब ने अपने पुत्र के उपचार के लिए उस समय के नामी वैद्यों और हकीमों की सहायता ली, लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ. जब सभी प्रयास विफल होते दिखाई दिए तो नवाब को हनुमान जी के परम भक्त बाबा अभयरामदास जी के बारे में जानकारी मिली. बाबा अभयरामदास उस समय अयोध्या में तप और भक्ति के लिए विख्यात संत माने जाते थे.