Video: पीली नहीं, अब 'काली हल्दी'! लागत साधारण पर कमाई तीन गुनी, औषधीय गुणों की है भरमार
Black Turmeric Farming: पश्चिम चम्पारण के नरकटियागंज, मझौलिया और बगहा में कुछ प्रगतिशील किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर काली हल्दी की ओर रुख कर रहे हैं. तीन साल से चल रहे इस प्रयोग ने किसानों के लिए नई संभावनाएं खोली हैं, क्योंकि साधारण हल्दी की तुलना में काली हल्दी की कीमत लगभग 3 गुना तक मिल रही है. खास बात यह कि लागत में बहुत अधिक अंतर नहीं है, लेकिन मुनाफा कहीं ज्यादा है. कृषक रविकांत बताते हैं कि काली हल्दी साल में 2 बार लगाई जा सकती है. फसल तैयार होने में 9 से 10 महीने लगते हैं. मल्टी लेयर एग्रीकल्चर तकनीक से किसान गर्म मौसम में भी जोखिम कम कर रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक अभिक पात्रा के अनुसार काली हल्दी में एंथोसायनिन, एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल जैसे गुण प्रचुर हैं, जो इसे औषधीय बाजार में खास बनाते हैं. फिलहाल यह फसल उत्तराखंड, पूर्वोत्तर, मध्य प्रदेश और हिमालय की तराई जैसे चुनिंदा क्षेत्रों की उर्वर मिट्टी तक सीमित है.