30 वर्षों से संत ने नहीं धारण किया सिला हुआ वस्त्र, रामानंदी संप्रदाय की है अनोखी परंपरा
अयोध्या में रहने वाले कई संत आज भी सिले हुए कपड़े नहीं पहनते. वे केवल धोती, चादर या अंगवस्त्र जैसे बिना सिले वस्त्रों का ही उपयोग करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार सिले हुए वस्त्र सांसारिक मोह, माया और भौतिक बंधनों का प्रतीक माने जाते हैं. जबकि बिना सिले वस्त्र त्याग, वैराग्य और साधना का प्रतीक होते हैं.संतों का मानना है कि जब साधक सांसारिक आकर्षणों से दूर होकर ईश्वर भक्ति में लीन होता है, तब उसे सरल और सात्विक जीवन अपनाना चाहिए.