चीन के 'चिकन नेक' पर पहरा, राफेल और ब्रह्मोस से चौबीसों घंटे नजर, भारत के हाथों में होगी ड्रैगन की सांस
Great Nicobar Project: भारत बदलते माहौल के अनुसार सामरिक नीतियों में लगातार बदलाव कर रहा है. पिछले कुछ वर्षों में देश और दुनिया में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिससे सैन्य क्षमताओं को बढ़ाना और उसे एडवांस करना बेहद जरूरी हो गया है. ईरान जंग ने एक बार फिर से बता दिया है कि समंदर किसी भी देश के लिए कितना अहम है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दुनिया का एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. इससे एक बात साफ हो गई कि समुद्री मार्ग को बाधित कर किसी भी देश के हितों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है. बता दें कि हिन्द महासागर पर चीन की कुटिल नजर है, ऐसे में भारत के लिए इस क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ाना जरूरी हो गया है. इसी को नजर में रखते हुए भारत ने मलक्का स्ट्रेट से तकरीबन 250 किलोमीटर दूर ग्रेट निकोबार में मिलिट्री बेस बना रहा है. इसपर तकरीबन 1 लाख करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है.