Rubika Liyaquat Show: क्या मनमोहन सिंह के रास्ते पर चलेंगे PM मोदी?

Rubika Liyaquat Show: क्या मनमोहन सिंह के रास्ते पर चलेंगे PM मोदी?
Rubika Liyaquat Show: आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है. ताजा अपडेट के मुताबिक पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हो गया है और ये सिर्फ एक दिन की बात नहीं है, पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. पिछले 5 दिनों में ही पेट्रोल करीब ₹3.87 और डीजल ₹3.51 तक महंगा हो चुका है. ऐसे में साफ है कि ट्रांसपोर्ट से लेकर रसोई तक हर चीज़ की लागत बढ़ने वाली है. क्योंकि पेट्रोल-डीजल सिर्फ गाड़ी में नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की रीढ़ हैं. सरकारी और आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला हर उतार-चढ़ाव सीधे भारत पर असर डालता है. अभी ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं. यही नहीं, हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई में अनिश्चितता की वजह से कीमतों पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. अगर हालात बिगड़ते हैं तो तेल के दाम और ऊपर जा सकते हैं, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा. अब सवाल ये उठता है कि इसका असर कहां-कहां दिखेगा? पेट्रोल-डीजल महंगे होने का मतलब है कि ट्रक का किराया बढ़ेगा, ट्रांसपोर्ट महंगा होगा और फिर सब्ज़ी, दूध, अनाज, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतें भी ऊपर जाएंगी. इसी बीच प्रधानमंत्री के हालिया बयान को लेकर भी चर्चा तेज है, जिसमें उन्होंने वैश्विक संकट और बदलते हालातों की ओर इशारा किया था. हालांकि सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि यह स्थिति वैश्विक कारणों से जुड़ी हुई है और इसमें भारत अकेला नहीं है, कई देश इसी दबाव का सामना कर रहे हैं. अब एक बड़ा सवाल यह भी है कि सरकार राहत कैसे दे सकती है? विशेषज्ञ मानते हैं कि वैट में कटौती, टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव, और वैकल्पिक ईंधन जैसे एथनॉल ब्लेंडिंग या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देकर कुछ हद तक राहत दी जा सकती है. लेकिन चूंकि भारत तेल आयातक देश है, इसलिए पूरी तरह नियंत्रण आसान नहीं माना जाता.