कभी माना जाता था बेकार झाड़, आज बन गया 'हरा खजाना'! आक की खेती से बदल रही किसानों की किस्मत, जानिए पूरा गणित

कभी माना जाता था बेकार झाड़, आज बन गया 'हरा खजाना'! आक की खेती से बदल रही किसानों की किस्मत, जानिए पूरा गणित
Aak Ki Kheti: खेती में बढ़ती लागत और पानी की कमी के बीच ‘आक’ (Calotropis) की खेती किसानों के लिए कमाई का नया विकल्प बनकर उभर रही है. यह पौधा बेहद कम पानी और कम देखभाल में भी आसानी से विकसित हो जाता है, इसलिए शुष्क और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए इसे उपयुक्त माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार एक बार पौधा लगाने के बाद यह कई वर्षों तक उत्पादन देता है और करीब 12 साल तक आय का स्रोत बना रह सकता है. आक के पौधे का उपयोग औषधीय उत्पादों, जैविक उद्योगों, प्राकृतिक रेशों और विभिन्न शोध कार्यों में किया जाता है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. कम लागत और बेहतर बाजार संभावनाओं के कारण किसान इसे अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपना रहे हैं.