दोस्ती से खेला तक की वह कहानी, जिसने BJP-TMC को बनाया ऐसा 'दुश्मन', महायुद्ध लगने लगा बंगाल का चुनावी दंगल
Mamata Banerjee Ka Khela: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की कहानी 1998 में शुरू हुई थी. तब तक ममता बनर्जी की पहचान पश्चिम बंगाल की कद्दावर कांग्रेसी नेता के तौर पर होती थी. 1997 में बंगाल कांग्रेस में कई ऐसे घटनाक्रम हुए, जिसकी वजह से ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाने का फैसला किया था. बताया जाता है कि उस दौर में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की बागडोर सोमेन मित्र के पास थी. ममता बनर्जी का मानना था कि सोमेन मित्र का तत्कालीन वामपंथी सरकार के लेकर रुख बेहद नरम था. वैचारिक मतभेद की वजह से ममता बनर्जी को अपनी ही पार्टी में उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा था. बात यहां तक बढ़ गई थी कि उन्हें 22 दिसंबर 1997 को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद, ममता बनर्जी ने अपनी नई पार्टी बनाने का फैसला किया. महज नौ दिनों के भीतर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नाम से अपनी नई पार्टी बना ली. उन्होंने एक जनवरी 1998 को आधिकारिकतौर अपनी नई पार्टी का ऐलान कर दिया और बीते 34 सालों से बंगाल की सत्ता में काबिज सीपीआई-एम के खिलाफ बिगुल फूंक दिया. इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्हें एक मजबूत साथी की जरूरत थी. ममता बनर्जी को यह साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मिला. उस समय बीजेपी और टीएमसी एक-दूसरे के लिए मजबूत स्तंभ की तरह थे. लेकिन, समय के साथ सबकुछ बदल गया. आज टीएमसी और बीजेपी एक-दूसरे की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी पार्टियां हैं. आइए, जानते हैं 26 सालों में कैसे बदली टीएमसी की राजनीति...