विक्रमशिला सेतु हादसा: आखिर क्यों ढह गई उत्तर बिहार की लाइफलाइन? किन फाइलों में बंद है असली 'गुनहगार' का नाम!
रविवार की रात ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने पिलर नंबर 133 के पास अचानक जमीन धंसने और डरावनी आवाजें सुनीं. खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने तत्काल पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर वाहनों का प्रवेश रोक दिया. इसके महज डेढ़ घंटे बाद पिलर नंबर 133 का स्लैब टूटकर गंगा की लहरों में समा गया. प्रशासन की तत्परता से जनहानि की घटना तो टल गई, लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर कई सवाल छोड़ गई.