मुरादाबाद के रामभक्त ने रामचरितमानस को अपने हाथों से 25 बार लिखकर पूरा किया संकल्प, जाने
अतुल कुमार ने वर्ष 1992 के बाद एक संकल्प लिया था कि जब तक अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण नहीं हो जाता तब तक वे निरंतर रामचरितमानस लिखते रहेंगे. यह संकल्प उन्होंने पूरी श्रद्धा और धैर्य के साथ निभाया. वर्षों की तपस्या के बाद उन्होंने 25 बार इस ग्रंथ को लिखकर अपने प्रण को पूर्ण किया. हालांकि उनकी यह हस्तलिखित प्रतियां पारंपरिक अर्थों में प्राचीन पांडुलिपि की श्रेणी में नहीं आतीं, लेकिन उनकी भावनात्मक और आध्यात्मिक महत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.