जहां मशीनें भी खा जाएं मात! सदियों पुरानी पत्थर तराशने की झारखंडी कला आज भी जिंदा
Handmade stone art village traditional craft story : जमशेदपुर के पास ढाई कुसुम गांव में आज भी कारीगर बिना मशीन के हाथों से पत्थर तराशकर कप, कटोरे, शिवलिंग और सजावटी सामान बनाते हैं. सदियों पुरानी यह कला गांव के 10–15 परिवारों की रोजी-रोटी है. शानदार हुनर के बावजूद इन्हें सही बाजार और पहचान अब तक नहीं मिल पाई है.