क्यों कुश ने छोड़ा था सुल्तानपुर? कालिदास के रघुवंश में मिला जिक्र, जानें त्रेता युग के कुशभवनपुर की कहानी
History of Sultanpur: सुल्तानपुर की ऐतिहासिक पहचान स्थापित करने में कालिदास का साहित्यिक योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. रघुवंश महाकाव्य में कालिदास लिखते है कि जब भगवान श्रीराम साकेत धाम चले गए तो अयोध्या का शासन उनके भतीजों और पुत्रों के हाथ में आ गया. उनके ज्येष्ठ पुत्र कुश, कुशावती या कुशभवनपुर (वर्तमान सुल्तानपुर) के शासक थे. एक प्रसंग के अनुसार एक रात अयोध्या के अधिदेवता ने किवाड़ लगे मंदिर में प्रवेश कर प्रार्थना की कि रामचंद्र जी के स्वर्ग जाने के बाद से अयोध्या रिक्त हो गई है. इसलिए आप पुनः आकर अयोध्या को बसाइए.