पलाश के पत्तों का खत्म होता दौर प्लास्टिक ने छीना पाठा के आदिवासियों का रोजगार, जाने
चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में कभी जंगलों से मिलने वाला पलाश का पत्ता लोगों की जिंदगी का सहारा हुआ करता था. यह सिर्फ एक पेड़ का पत्ता नहीं, बल्कि सैकड़ों आदिवासी परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया था, लेकिन अब बदलते दौर और प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल ने इस परंपरागत रोजगार को लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंचा दिया है. जिससे उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है.