ना DMK का दम, ना AIADMK का गम... तमिलनाडु में अब 'विजय' भव! थलापति बदलेंगे 'ब्राह्मण' विरोध वाली पॉलिटिक्स?
तमिलनाडु की राजनीति का इतिहास सिर्फ सामाजिक न्याय, भाषाई अस्मिता और क्षेत्रीय गौरव के संघर्ष के नाम पर ब्राह्मणों और हिंदी के विरोध से शुरू हुआ था. जस्टिस पार्टी से शुरू हुआ गैर-ब्राह्मण आंदोलन पेरियार, अन्नादुराई, करुणानिधि, एमजीआर और जयललिता जैसे दिग्गज नेताओं के दौर से गुजरते हुए अब थलापति विजय तक पहुंच चुका है. डीएमके और एआईएडीएमके के दशकों लंबे प्रभुत्व के बाद विजय की टीवीके पार्टी ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है. पारुल और निशांत की इस बातचीत से जानिए तमिलनाडु की राजनीति में क्या है ब्राह्मण विरोध और हिंदी से नफरत की जगह.