क्या सच में दुनिया Energy Crisis में फंस चुकी है? 40 देशों के फैसले ने मचाया हड़कंप
Energy Crisis 2026: दुनिया इस वक्त एक बड़े और धीरे-धीरे गहराते हुए एनर्जी क्राइसिस की तरफ बढ़ती दिख रही है. बात सिर्फ पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की नहीं है, बल्कि अब मामला बिजली, ईंधन और संसाधनों की बचत तक पहुंच चुका है. कई देशों में सरकारें लोगों से सीधे अपील कर रही हैं कि कम यात्रा करें, गैर-जरूरी खर्च घटाएं, बिजली की खपत कम करें और जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम को अपनाएं. यानी लाइफस्टाइल धीरे-धीरे 'फ्यूल सेविंग मोड' में शिफ्ट होती दिख रही है. भारत में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा संरक्षण और जिम्मेदार उपभोग को लेकर की गई अपील को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. कुछ लोग इसे जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ के रूप में देख रहे हैं. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि भारत अकेला नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के 40 से ज्यादा देश पहले ही ऐसे कदम उठा चुके हैं, जहां ईंधन बचाने और ऊर्जा नियंत्रण को लेकर सख्त या सलाहात्मक नीतियां लागू की गई हैं. यूरोप से लेकर एशिया तक कई सरकारें अब ऊर्जा को सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रही हैं.