कभी चिड़ियों की चहचहाट से पहाड़ों में होती थी सुबह, गौरैया के साथ ये पक्षी भी हुए गायब, मॉडर्न घरों ने ली जगह, जाने
कभी अपनी शांत वादियों और लीची के बागों के लिए जाना जाता था देहरादून, लेकिन आज यह एक अलग ही शोर में डूबा हुआ है. पुराने दून की यादों की किताब पलटें, तो सबसे पहला पन्ना गौरैया की चहचहाट से खुलता है. शहर की सड़कों पर गाड़ियों के हॉर्न की कर्कश ध्वनि ने उस कोमल संगीत की जगह ले ली है, जो कभी हमारी नींद को जगाया करता था. वो आंगन, वो दाना और फुदकती गौरैया पुराने दौर में घर सिर्फ ईंट-पत्थर के मकान नहीं, बल्कि एक छोटा सा पारिस्थितिकी तंत्र हुआ करते थे.