दो हफ्ते की विदेशी मुद्रा बची थी, देश दीवालिया हो रहा था, सोना गिरवी रखना पड़ा, फिर हुआ LPG का जादू
ये कह सकते हैं कि वो दौर भारत के आर्थिक इतिहास का सबसे बदतर दौर था. 1991 के आर्थिक संकट में देश बहुत गंभीर दौर था. देश "दिवालिया" होने की कगार पर खड़ा था. तब कैसे इस बुरे हाल से निकले. सालभर के अंदर देश की अर्थव्यवस्था में जान दिखने लगी और तीन साल के भीतर हम वाकी आर्थिक ताकत होने की ओर बढ़ चले.