तंगहाली में बीता बचपन, संसद में घुसकर जाम कर दिया पूरा सिस्टम, जिसके सामने आते ही कांपने लगते थे अंग्रेज
मोतीलाल नेहरू नरमपंथी नेता माने जाते थे. लेकिन 1919 के जलियांवाला बाग कांड ने उन्हें झकझोर दिया. निर्दोषों की डरावनी लाशें देखकर उनका खून खौल उठा था. उन्होंने कहा था, 'मेरा खून अब भारी रूप से खौल रहा है'. उन्होंने पंजाब जाकर बेगुनाहों का मुफ्त में केस लड़ा. महात्मा गांधी के भारी संपर्क में आकर उन्होंने जीवन देश को सौंप दिया.